मध्यप्रदेश

एसएफआईसी डेटा एनालिटिक्स के आधार पर की कड़ी कार्रवाई

भोपाल 

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

राज्य में शासकीय निधियों के संरक्षण और वित्तीय पारदर्शिता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से की जा रही निगरानी के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। स्टेट फाइनेंशियल इंटेलिजेस सेल (एसएफआईसी) द्वारा डेटा एनालिटिक्स के आधार पर किए गए गहन विश्लेषण के बाद 530 से अधिक आरोपियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए एफ.आई.आर. दर्ज कराई जा चुकी है। गंभीर मामलों में संलिप्त 22 कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इस सख्त निगरानी और समानांतर जांच प्रणाली से अब तक गबन एवं अनियमित ट्रांसफर की कुल 223 करोड़ रूपये की राशि शासन की संचित निधि में सफलतापूर्वक वापस कराई जा चुकी है।

अनियमित ट्रांसफर की प्रभावी वसूली

एसएफआईसी द्वारा वर्ष 2011 से अब तक के वित्तीय लेनदेन का नियमित डेटा विश्लेषण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में कुल 315 करोड़ रूपये की राशि को 'संदिग्ध श्रेणी' में चिन्हित कर जांच के अधीन रखा गया है। पुरानी अवधि के आंकड़ों के विश्लेषण से अद्यतन हुई इस राशि पर त्वरित कार्रवाई करते हुए शासन द्वारा 61 करोड़ रूपये के प्रमाणित गबन की वसूली पूरी कर ली गई है। इसके साथ ही 162 करोड़ रूपये शासकीय बैंक खाते से सरकारी खजाने में जमा कराया गया है।

भ्रष्टाचार निवारण और आईटी एक्ट की कठोर धाराओं में मामले दर्ज

मामलों की गंभीरता को देखते हुए आयुक्त कोष एवं लेखा द्वारा पुलिस महानिदेशक से निवेदन किया गया था कि जांच में प्रमाणित गबन के प्रकरणों में पुलिस एफ.आई.आर. दर्ज करते समय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की कठोर एवं सुसंगत धाराएं जोड़े। इसके बाद पुलिस स्तर से आरोपियों के खिलाफ अत्यंत प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकी है।

भविष्य के लिए लागू और प्रस्तावित अभेद्य सुरक्षा तंत्र

वित्तीय प्रणालियों को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए बीते 3 वर्षों में कई निरोधात्मक उपाय लागू किए गए हैं। मैन्युअल सिस्टम खत्म कर ई-जीपीएफ और ई-डीपीएफ के लिए महालेखाकार कार्यालय और पेंशन संचालनालय से ऑनलाइन अप्रूवल की इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था शुरू की गई है। इसके अलावा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, डिजिटल सिग्नेचर, वेतन भत्तों में कैपिंग सिस्टम, आधार आधारित भुगतान, रोम्स पोर्टल और आरबीआई के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म को अनिवार्य किया गया है।

 

Related Articles

Back to top button