मध्य प्रदेश में बच्चों की जिंदगी में बदलाव की मुहिम
यूनिसेफ और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) का संवाद सम्मेलन

मध्य प्रदेश में बच्चों की जिंदगी में बदलाव की मुहिम
इंदौर। इंसानी जिंदगी का सबसे सुनहरा काल बचपन होता है और इस दौरान बच्चा स्वस्थ हो तो उसका बाकी जीवन बेहतर होगा इसकी उम्मीद की जा सकती है। मध्य प्रदेश में बच्चों की जिंदगी बेहतर बनाने के प्रयास जारी है।
यूनिसेफ और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने ‘बच्चों से एक वादा पोषण एनीमिया निवारण और बाल संरक्षण को प्राथमिकता’ विषय पर एक सकारात्मक संवाद सम्मेलन का संयुक्त रूप से आयोजन किया। उक्त संवाद में राज्य में बच्चों को प्रभावित करने वाले दो महत्वपूर्ण मुद्दे एनीमिया और बाल संरक्षण पर सामूहिक कार्रवाई को मजबूत करने के लिए वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, नागरिक समाज के प्रतिनिधि, मीडिया और युवा सरपंच युवा समाजसेवी एवं सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर एनसीसी स्काउट गाइड के युवा प्रतिनिधि शामिल हुए।
मुख्य भाषण देते हुए सिंथिया मैककफ्री, प्रतिनिधि यूनिसेफ भारत , ने लैंगिक समानता को बढावा देने, पोषण में सुधार और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य की प्रतिबद्धता की सराहना की, जब बच्चे अच्छी तरह से पोषित होते हैं, सुरक्षित होते हैं, और उन्हें सीखने और खेलने के लिए सकारात्मक वातावरण मिलता है, तो वे सफल होते हैं – और यह वह वादा है जिसे हमें पूरा करना होगा। एनीमिया को कम करना, बाल विवाह को रोकने और लडकियों की शिक्षा को बढावा देने के केंद्रित प्रयास ही समाज में बडे परिवर्तन को ला सकते हैं मैककफ्री ने कहा, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के साथ हमारी साझेदारी खेल का उपयोग बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के साथ-साथ कृ विशेष रूप से लड़कियों कृ में आत्मविश्वास और जीवन कौशल बनाने के लिए एक बेहतरीन प्रयास है । सुरक्षित, समावेशी स्थान बनाना जहाँ युवा बढ सकें, नेतृत्व कर सकें, और अपने भविष्य को आकार दे सकें, मजबूत, अधिक न्यायसंगत समुदायों के निर्माण के लिए आवश्यक है।
शिव शेखर शुक्ला, अतिरिक्त मुख्य सचिव (पर्यटन, गृह और संस्कृति), ने महिला सशक्तिकरण के लिए राज्य में होने वाले सकारात्मक प्रयासों पर प्रकाश डाला और बाल अधिकारों को आगे बढावा देने के लिए संवाद में सहयोगात्मक प्रयासों की सराहना की।
डॉ. सुदाम पंढरीनाथ खाडे, संभागायुक्त, इंदौर संभाग, ने लडकियों के लिए एक समावेशी और न्यायसंगत वातावरण बनाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार चलाए जा रहे हैं प्रयासों के साथ-साथ कहीं भी भगोर कार्यक्रमों में प्रदेश में प्राथमिकता के तौर पर महिलाओं के आरक्षण की सराहना की अनेकों विभागों के समन्वय और स्थानीय कार्यान्वयन पर राज्य के गतिविधि और कार्यक्रमों की सहन करते हुए, उन्होंने कहा, ष्हमारी सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशील और प्रतिबद्ध है कि मध्य प्रदेश में प्रत्येक बच्चे, विशेष रूप से लडकियों को पोषण, सुरक्षा और अवसर तक पहुंच मिले। हम अपनी प्रमुख योजनाओं को अंतिम छोर तक अधिक प्रभावी बनाने के लिए संकल्पित हैं। डॉ. खाडे ने यूनिसेफ, आईसीसी और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच सहयोगात्मक प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसी साझेदारियाँ सामुदायिक जागरूकता में तेजी लाने और बच्चों और किशोरों की भलाई के लिए स्थानीय नेतृत्व को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इस संवाद में क्रिकेट आइकॉन मिताली राज, आईसीसी राजदूत और भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान, भी शामिल हुईं, जिन्होंने लड़कियों को प्रेरित करने और सशक्त बनाने के लिए खेल की शक्ति के बारे में भावुकता से बात की। अपनी स्वयं की यात्रा पर चर्चा करते हुए, उन्होंने कहा, जब हम लडकियों के स्वास्थ्य और अवसरों में निवेश करते हैं, तो हम उन्हें बिना किसी बाधा के सपने देखने का आत्मविश्वास देते हैं। उन्होंने युवा प्रतिभागियों से खुद पर विश्वास करने और अपने समुदायों में बदलाव लाने के लिए अपनी आवाज और प्रतिभा का उपयोग करने का आग्रह किया।
प्रेरणादायक आवाजों में, मध्य प्रदेश की यूनिसेफ इंडिया युवा अधिवक्ता गौरांशी शर्मा भी थीं, जिन्होंने बोलने और सुनने में अक्षम होने के बावजूद, ब्राजील में 2021 डेफलिंपिक्स में बैडमिंटन में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था। सांकेतिक भाषा अनुवाद के माध्यम से बोलते हुए, उन्होंने कहा, ष्दिव्यांगता यह परिभाषित नहीं करती कि एक लडकी क्या हासिल कर सकती है। सही समर्थन और समान अवसर के साथ, हर लडकी ऊंची उडान भर सकती है और अपने देश को गौरवान्वित कर सकती है।
संवाद मे मध्य प्रदेश की प्रमुख योजनाओं जैसे एनीमिया मुक्त भारत, लाड़ली लक्ष्मी योजना, और बेटी बचाओ बेटी पढाओ के माध्यम से हुई प्रगति पर प्रकाश डाला, लड़कियों की शिक्षा को आगे बढ़ाया है, बाल विवाह को रोकने हेतु सघन प्रयास किए है, और स्वास्थ्य और लैंगिक समानता पर सामुदायिक प्रयास को मजबूत किया है। वक्ताओं ने बाल संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने और यह पूर्ण रूप से सुनिश्चित करने के लिए बच्चों की आवाज स्थानीय शासन जैसे ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीटीपी) में परिलक्षित हो, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा और पंचायती राज विभागों के बीच निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
समान रूप से सभी के सकारात्मक विचारों जहाँ सरकारी अधिकारियों, युवाओं और समाज में नेतृत्व कर रहे हैं विभिन्न सकारात्मक नेतृत्व वाले लोगों के साथ सुपोषित और समर्थ मध्य प्रदेश कृ एक पोषित और सशक्त राज्य जहाँ हर लडकी सीख सकती है, बढ सकती है और नेतृत्व कर सकती है के प्रण के साथकृसकारात्मक संवाद का समापन हुआ