मध्यप्रदेशराजनीति
ज्योतिरादित्य सिंधिया का क्यों बदल रहा है सियासी अंदाज !
सिंधिया के लिए भी महाराजा की छवि से बाहर निकलना जरूरी
भोपाल, मध्य प्रदेश की सियासत में तेजी से बदलाव आ रहा है और यह बदलाव तो कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सियासी अंदाज में बदलाव नजर आने लगा है.
सिंधिया के सियासी अंदाज में आ रहे बदलाव को वर्तमान दौर की जरूरत और मजबूरी के तौर पर देखा जा रहा है. सिंधिया का ग्वालियर-चंबल के सिंधिया राजघराने से नाता है और इस परिवार का इस इलाके में लंबे अरसे तक दबदबा रहा है. सिंधिया कभी कांग्रेस में हुआ करते थे और भाजपा का हिस्सा बन गए हैं.
सिंधिया के भाजपा में आने के बाद ग्वालियर-चंबल इलाके के कांग्रेस के नेताओं की निशान पर तो वे हैं साथ में कई भाजपा के ऐसे नेता हैं जिन्हें सिंधिया रास नहीं आ रहे हैं. इतना ही नहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया को महाराजा के तौर पर स्थापित करने में उनके विरोधी कोई कसर नहीं छोड़ रहे. लिहाजा सिंधिया के लिए भी इस छवि से बाहर निकलना जरूरी हो गया है. उसी का नतीजा है कि सिंधिया की एक तरफ सक्रियता तो बढ़ ही रही है वहीं वे अपनी सियासी रणनीति में भी बदलाव ला रहे हैं. बीते दिनों सिंधिया का आदिवासियों के सम्मेलन में नृत्य करना उसके बाद ग्वालियर के होटल में जाकर उनके कर्मचारियों से संवाद और आम लोगों के सुख-दुख का हिस्सा बनना उनके बदलते सियासी अंदाज की गवाही देता है. सिंधिया भाजपा के नेताओं से तो मेल मुलाकात बढ़ा रहे हैं] राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों के बीच पहुंचने में हिचक नहीं रहे हैं. सिंधिया के बदले अंदाज से कॉन्ग्रेस तो हतप्रभ है ही साथ में भाजपा के कई नेता भी इसे अपने लिए चुनौती मान रहे हैं.



