मध्यप्रदेश

डिंडौरी में आदिवासियों ने चंदा जुटाकर बना दिया सरकारी स्कूल, 3 साल तक नहीं मिली सरकारी मदद

डिंडौरी
सरकारी दावों और खोखले आश्वासनों से जब मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले के आदिवासियों का सब्र टूट गया, तो उन्होंने सिस्टम के भरोसे बैठना छोड़ दिया। जिले के समनापुर ब्लॉक के एक आदिवासी बहुल गांव में ग्रामीणों ने मिलकर खुद ही अपने बच्चों के लिए स्कूल की इमारत खड़ी करने का फैसला कर लिया। इसके लिए न केवल फंड जुटाया गया, बल्कि गांव के पुरुष, महिलाएं और बुजुर्ग खुद राजमिस्त्री और मजदूर बनकर तगाड़ी-फावड़ा उठाए नजर आ रहे हैं।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

दरअसल, इस आदिवासी टोले में एकमात्र सरकारी प्राथमिक स्कूल था, जिसे स्कूल शिक्षा विभाग ने तीन साल पहले 'जर्जर और असुरक्षित' घोषित कर जमींदोज कर दिया था। अधिकारियों ने तब जल्द ही नया भवन बनाने का वादा किया था, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी वहां एक ईंट तक नहीं रखी गई।

100 परिवारों ने जोड़े 500-500 रुपये
सरकारी फाइलों में बजट की लेट-लतीफी से बच्चों की पढ़ाई दांव पर लगी देख, इस महीने गांव के करीब 100 परिवारों ने एक आपात बैठक बुलाई। तय हुआ कि हर घर से 500-500 रुपये का योगदान दिया जाएगा ताकि निर्माण सामग्री खरीदी जा सके। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे पूरा गांव मिलकर सीमेंट का मसाला तैयार कर रहा है, ईंटें ढो रहा है और स्कूल की नींव तैयार कर रहा है।

प्रशासन को 'गिफ्ट' करेंगे स्कूल
ग्रामीणों का कहना है कि दर्जनों अर्जियां और अफसरों के साथ कई बैठकें बेनतीजा रहने के बाद उन्होंने यह सामूहिक कदम उठाया है। ताज्जुब की बात यह है कि ग्रामीणों ने तय किया है कि वे स्कूल तैयार होने के बाद इसे जिला प्रशासन को 'गिफ्ट' कर देंगे ताकि वहां शिक्षक भेजे जा सकें।

उधर, इस पूरे मामले पर जिला परियोजना समन्वयक (DPC) दिवाकर तिवारी ने ग्रामीणों के गुस्से को जायज ठहराया है। उन्होंने दबी जुबान में अपनी लाचारी कबूल करते हुए कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग को अभी तक स्कूल के पुनर्निर्माण के लिए जरूरी फंड ही प्राप्त नहीं हुआ है।

Related Articles

Back to top button